ख्वाहिश

 तुझे मिलने की ख्वाहिश है जो यह जान भी नहीं जाती,
तू जाने है मेरी हालत मगर फिर भी नहीं आती।
मोहब्बत थी नहीं तो क्यूँ हस कर गुज़रती थी,
नज़रें मिलाने की थी क्या कोई ज़बरदस्ती।
युहीं गर खेलना था तो दिल मेरे से क्यूँ खेला,
मेरी तू न थी मंजिल किया फिर क्या ये झमेला।
अगर अब तेरी सूरत मेरी नज़रों ने न देखी,
निकल जाएगी जान जल्दी हुई गर ऐसी अनदेखी।
तड़प मेरी ही किस्मत में तुने जाने क्यूँ लिखदी,
तेरे तो चाहने वालों की थी फैरिस्त लम्बी सी।
कोई ऐसी खबर पाने को बेठें हैं अभी तक हम,
के शायद आसमानों में मीलों तो हो न ये सितम
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One thought on “KHWAHISH

  1. obsession, last painmake me laughtmy cage is my boredome.in a moment of ragei missed youso many beastso many problemoh yes i will dieand get up theirbut only when the moment will come

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