ये सारी दूरियां ….

यूहीं रात दिन जगूं,
पीछे तेरे आके मै रुकूँ,
तुझसे कभी मगर,ये कह भी न सकूं,
की तू ही दिल का मेरे सुकूँ,
तू मेरे जिस्म की है रूह,
ज़िन्दगी तुझी में है,
हर ख़ुशी तुझी से है,
एहसास को मेरे कर महसूस रूबरू,
की अब धड़कन की धुन तू ही,
तू ही सरगम की साज़ है,
जो लाऊं तेरे चेहरे पे हसी,
तो होता मुझे ख़ुद पे नाज़ है,
मिलजा मुझे कभी अब इस तरह से तू,
जैसे सागर-नदी मिलें,
जैसे पानी में कुछ घुले,
के अब बेकरार हूँ,करता जो प्यार हूँ,
जो अब तुझे पा ना पाऊंगा,
तो धीरे-धीरे मरता जाऊंगा,
चलेगी फिर सांस भी नहीं,
दिखेगी जो संग तू नहीं,
करदे खत्म अब,सनम ये सारी दूरियां,
ये सारी दूरियां,ये सारी दूरियां ……

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5 thoughts on “Ye Saari Dooriyan

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