फिर याद तेरी आ जाती है।

काले-काले बादल से,सूरज की किरण जब आती है,
फिर याद तेरी आ जाती है,फिर याद तेरी आ जाती है।

एक जंगल सुनसान हो,
न मौजूद कोई इंसान हो,
काला-काला अँधियारा हो,
सूना-सूना हर किनारा हो,
दूर कहीं से फिर सुनाई जब एक धीमी पुकार आ जाती है,
फिर याद तेरी आ जाती है,फिर याद तेरी आ जाती है।

एक सागर वीरान हो,
भयंकर सा तूफ़ान हो,
कोहरे की ऐसी माया हो,
दिखता न अपना साया हो,
ऊँची-ऊँची वो लहरें जब अचानक थम जाती हैं,
फिर याद तेरी आ जाती है,फिर याद तेरी आ जाती है।

कोई भूखा-बीमार हो,
मुसीबतों का प्रहार हो,
नन्हे-नन्हे हाथों में,
भारी-भारी औज़ार हो,
उन भूली गुमसुम गलियों में जब हसी खिलखिलाती है,
फिर याद तेरी आ जाती है,फिर याद तेरी आ जाती है।



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4 thoughts on “Phir Yaad Teri Aa Jaati Hai

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